शहर के क़िस्से

संकट हिफ़ाज़त मुक्ति

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शहर के अवशेष, मुक्ति के वादे:

शहर के बिखरते जाने से हर चीज़ ख़त्म नहीं हो जाती. अवशेष और मलबे बचे रहते हैं और नई ज़िंदगियाँ जीते रहते हैं. उनसे प्रवासियों के लिए कामचलाऊ ठिकाने बनते हैं, उनसे आंदोलनों को ताक़त मिलती है, वे आज़ादी का नारा बन जाते हैं, और इस प्रक्रिया में वे शहर की संभावनाओं में एक नई जान डालते हैं.

राम कुमार द सिटी, 1958कैनवस पर ऑयल
राम कुमार अनटाइटल्ड (बनारस), 1963कैनवस पर ऑयल
बिकास भट्टाचार्जी इन जून 19, 1976 काग़ज़ पर मिश्रित माध्यम, गत्ते पर चिपकाए हुए
गुलाममोहम्मद शेख़अहमदाबाद: द सिटी गांधी लेफ़्ट बिहाइंड, 2015-16कैनवस पर केसिन और पिगमेंट
आशिम पुरकायस्थ शेल्टर, 2019पाई हुई वस्तुएँ, राइस पेपर, पत्थर की ईंटें
आशिम पुरकायस्थअनटाइटल्ड, 2019 कैनवस पर एक्रिलिक
अनिता दुबे स्टोन माउंटेन, 2016 365 पत्थर, मखमल, शीशा, अल्युमिनियम